रोबक का सिर by Albrecht Dürer - लगभग 1503 - 22.86 x 15.39 से. मी. रोबक का सिर by Albrecht Dürer - लगभग 1503 - 22.86 x 15.39 से. मी.

रोबक का सिर

कागज़ पर ब्रश और धूसर रंग की स्याही • 22.86 x 15.39 से. मी.

  • Albrecht Dürer - May 21, 1471 - April 6th, 1528 Albrecht Dürer

    लगभग 1503

आज हम पेश कर रहे हैं एक रोबक यानी नर हिरन का चित्र, जब मैने इसे पहली बार देखा तो मुझे रेंडियर की याद आई। क्रिसमस के लिए आपकी तैयारी कैसी चल रही हैं? अगर आपके पास अभी उपहार तैयार नहीं हैं तो DailyArt शॉप पर हमारे कलात्मक उत्पादों पर ज़रूर नज़र फेरें। आज वह आखरी दिन हैं जब हम दावा कर सकते हैं की आपका ऑर्डर क्रिसमस के एक दिन पहले तक ज़रूर पहुँचेगा। 

अल्ब्रेक्ट ड्यूरर को जर्मनी का सबसे महान कलाकार माना जाता है, और उनके बनाए चित्र प्रकृतिवाद के बेहतरीन उदाहरण माने जाते हैं। इस चित्र में, रोबक की खुली और सतर्क आखों के ज़रिए, वह एक शिकार होने वाले जानवर का डर चित्रित करते हैं। कलम की सिर्फ़ कुछ ही सटीक और समान रेखाओं का इस्तेमाल कर (खासकर भौं के इर्द-गिर्द और आँखो के नीचे) वह इस पशु  की सतर्कत्ता और बेचैनी का वर्णन विशिष्ट ढंग से करते हैं।  

ड्यूरर पशुओं को उतनी ही गंभीरता और सुनिश्चितता से देखते थे जितना कि वह इंसानी विषयों को। अवसर मिलने पर वह ऐसे चित्र आँखों-देखी कथन पर आधारित कर, उनके आकार को वैज्ञानिक परिशुद्धता और भावनात्मक समझ से बनाते थे। उनके चित्रों में शुद्धता और संवेदना का एक संतुलन नज़र आता है। बारीक और नियंत्रित रेखाओं का इस्तेमाल कर ड्यूरर, न सिर्फ़ ढांचे और चाल को, बल्कि प्राणी के आंतरिक स्तिथि को भी चित्रित करते थे। उन्होंने शरीर रचना का गहराई से अध्ययन किया और इस बात को समझा कि पर एवं खाल के नीचे मांसपेशियाँ और हड्डियाँ, शरीर को कैसे आकार देती हैं। इसके बावजूद उनके चित्रों में पशु केवल जैविक अध्ययन नहीं लगते थे बल्कि उनमे व्यक्तित्व एवं जीवन के भाव मौजूद थे। प्रकाश और छाया का हल्का प्रयोग कर वह उन्हें जीवंत बना देते थे।  

पुनश्च - अल्ब्रेक्ट ड्यूरर के पशुओं के बारे में और जानिए।