1886 में लुईज ब्रेसलाउ ने यह पोर्ट्रेट चित्र एक ऐसे क्षण में बनाया जब वह निजी और कलात्मक अनिश्चितता से गुज़र रहीं थीं। ज़्यूरिख़ में जन्मी, वह इस चित्र के निर्माण से एक दशक पहले, पेरिस चलीं गईं थीं जहाँ उन्होंने अकादमी जूलियाँन के वुमेन्स स्टूडियो में पढ़ाई करी, वहाँ शिक्षकों ने तुरंत ही उनके हुनर और योग्यता को पहचाना। पहले एडगर देगास और आगे चलकर जूल्स ब्रेटन की प्रकृतिवाद से प्रभावित, ब्रेसलाउ को उनके पोर्ट्रेट चित्रों के माध्यम से सफलता हासिल हो चुकी थी। इसके बावजूद, वह हमेशा संदेह से घिरी रहीं, 1885 में उन्होंने लिखा की जब तक वह अपनी योग्यता एक बार फिर साबित नहीं कर पातीं, तब तक वह ख़ुद को खोया हुआ महसूस करेंगी।
ख़ुद को चुनौती देने के भाव से, ब्रेसलाउ ग्रामीण क्षेत्रों की ओर जाने लगीं और बड़े आकर की अपनी पहली, बाहरी रचना पर उन्होंने काम शुरू किया। सैनोइस में स्थित, अपने मित्र के स्टूडियो के बगीचे में उन्होंने यह चित्र बनाया, जहाँ उन्होंने अपने साथी चित्रकार को बाहर बैठे, चित्र बनाने की प्रक्रिया में चित्रित किया। 1886 में पेरिस सैलून के आलोचकों ने इसे तुरंत ही प्रभाववादी घोषित किया, विशेष रूप से उस प्राकृतिक प्रकाश की प्रशंसा की जो दृश्य में बदलती हुई परछाई डालती है—यहाँ तक की टोपी के नीचे मॉडल के चेहरे को भी छायादार कर देती है।
यह चित्र उनके लिए एक नया मोड़ लेकर आया। एक्सपोज़िशन यूनिवर्सेल में प्रदर्शित यह चित्र, ब्रेसलाउ को स्वर्ण पदक लेकर आया। जीवन-आकार में बनाई गई इस रचना में एक महिला चित्रकार को आत्मविश्वास के साथ, खुले वातावरण में चित्र बनाते और सीधे दर्शक से नज़रें मिलाते हुए दिखाया गया है, जो महिलाओं की कला जगत में स्थान को लेकर एक शांत लेकिन प्रभावशाली संदेश देता है—एक ऐसे समय में जब अकादमी दे बो-आर्ट्स जैसे संस्थान महिलाओं के लिए बंद थे।
पुनश्च - आप ऐसे और भी कृतियाँ हमारे वूमेन आर्टिस्ट 50 पोस्टकार्ड सेट में पा सकते हैं, जिसमे कला इतिहास के विभिन्न पथप्रदर्शक महिला कलाकार मौजूद हैं।
पुनः पुनश्च - क्या आप स्कूल या काम पर बोर हो रहे हैं? तो चलिए एल आर्ट क्विज खेलते हैं! क्या आप बता सकते हैं कि इन चित्रों में क्या अनुपस्थित है?
Louise Catherine Breslau