ग्रीफ़स्वाल्ड के पास एल्डेना का विनष्ट मठ by Caspar David Friedrich - 1824–1825 - 35 x 49 से.मी. ग्रीफ़स्वाल्ड के पास एल्डेना का विनष्ट मठ by Caspar David Friedrich - 1824–1825 - 35 x 49 से.मी.

ग्रीफ़स्वाल्ड के पास एल्डेना का विनष्ट मठ

कैनवास पर तेल • 35 x 49 से.मी.

  • Caspar David Friedrich - 5 September 1774 - 7 May 1840 Caspar David Friedrich

    1824–1825

यह मौक़ा इस हफ़्ते को आनंददायक और आशावादी तरीके से शुरू करने का है!

कैस्पर डेविड फ़्रीड्रिच के स्वस्थल ग्रीफ़स्वाल्ड के पास स्थित एल्डेना का यह सिस्टर्शियन मठ, उनके सबसे पसंदीदा रूपांकनों में से एक था। उन्होंने एल्डेना को अपने लिए उस समय खोज निकाला जब रोमांटिक पीढ़ी की धारणा थी की गॉथिक शैली एक जर्मन आविष्कार है, जो इस शैली को अपने समय के आदर्श के रूप में मानते थे। यह प्रकृति को दर्शाने की एक शैली थी, और साथ ही स्वतंत्रता की ओर वृद्धि की अभिव्यंजना भी। 

खंडहर का यह दृश्य बनाने से पहले उन्होंने कई स्केच बनाए, जिनमे 1803 का एक अध्ययन भी शामिल है, जिसके ऊपर यह चित्र काफ़ी हद तक आधारित है। खूबसूरत उगते शाहबलूत के वृक्ष जो इस गॉथिक निर्माण का फ्रेम बनाते हैं, दरअसल फ़्रीड्रिच की कलात्मक उपलब्धि है। परंतु खंडहर के बीच दिखाई देने वाली झोपड़ी वास्तव में मौजूद थी—जो 1828 तक वहाँ टिकी रही जब आख़िरकार संरक्षण के काम के दौरान उसे वहाँ से हटा दिया गया। 

कैस्पर डेविड फ़्रीड्रिच शुरुआती रोमांटिक दौर के सबसे महत्वपूर्ण जर्मन चित्रकार और मानचित्रकार थे। उनकी रचनाएँ पारलौकिक श्रेष्ठता को परिभाषित करती हैं। उन्होंने प्रकृति को दर्शाने का एक नया उपाए खोज निकाला, जहाँ वह अक्सर रुकेनफ़िगुर (जहाँ दृश्य को देख चिंतन कर, एक आकृति दर्शक की ओर पीठ करे खड़ी होती है) का इस्तेमाल करते थे; वह अपने बनाए परिदृश्य में धार्मिक अर्थ भी जोड़ते थे, जिसमे ऐसे अपरिष्कृत एवं प्रभावशाली शीतकालीन दृश्य होते थे जो पहले कभी देखें नहीं गए थे। फ़्रीड्रिच की बदोलत ही पश्चिमी कला में परिदृश्य चित्र को एक महत्वपूर्ण दर्जा मिला। 

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