हालाँकि वाल्डेमार शॉनहाइडर मोलर को अक्सर प्रतीकवाद से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन प्रकाश और दृश्य-बोध से संबंधित उनके प्रयोग उन्हें उत्तर-प्रभाववाद से भी जोड़ते हैं। फ्रांसीसी आलोचक लेओं बाज़ालजेट ने उन्हें “ल पैंत्र दु सोलेय” ("सूर्य का चित्रकार”) कहा था। वास्तव में, कलाकार सूर्य के प्रकाश की ओर देखने से होने वाले भौतिक अनुभव से अत्यंत प्रभावित थे। उन्होंने सूर्य की ओर देखते समय आँखों को दिखाई देने वाले झिलमिलाते लाल, बैंगनी, नारंगी और पीले रंगों को चित्रों में उतारने का प्रयास किया। प्रकाश संबंधी प्रभावों में उनकी रुचि का फोटोग्राफी से गहरा संबंध था। फोटोग्राफी के प्रति यह लगाव उनके मित्र विल्हेम हैमरशोई में भी था। उन्होंने कुछ समय स्कागेन में भी बिताया, जहाँ उनकी निकटता अन्ना एंकर से हुई। अन्ना एंकर ने 1893 में उनका चित्र बनाया था।
1894 में अपनी पत्नी के साथ फ्रांस जाने के बाद शॉनहाइडर मोलर फ़ॉन्टेनब्लो में बस गए, जहाँ उन्होंने सूर्य को विषय बनाकर अपने अनेक उल्लेखनीय चित्रों की रचना की। उनका कलात्मक जीवन दुर्भाग्यवश बहुत छोटा रहा। मानसिक बीमारी से पीड़ित होने के कारण उन्होंने 1901 में चित्रकारी करना बंद कर दिया और 1905 में केवल 41 वर्ष की आयु में आरहूस में उनका निधन हो गया। आरंभ में उनकी कृतियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया, लेकिन बाद में उन्हें काफी हद तक भुला दिया गया। आज उनके प्रकाशमय चित्रों को अत्यंत आधुनिक प्रयोगों के रूप में फिर से खोजा जा रहा है, जिनमें प्रकाश स्वयं चित्र का मुख्य विषय बन जाता है।
पी.एस. सूर्य के प्रकाश के प्रति आकर्षण शॉनहाइडर मोलर तक ही सीमित नहीं रहा। एक पीढ़ी बाद एडवर्ड मुंक ने भी सूर्य को अपने आप में एक स्वतंत्र विषय बनाया तथा उसकी तीव्र चमक, रंगों और भावनात्मक शक्ति का अन्वेषण किया। उनकी विशाल कृति द सन इस विचार को और आगे ले जाती है तथा प्रकाश को लगभग अमूर्त एवं दीप्तिमान शक्ति में बदल देती है। आप ‘द सन’ का उच्च गुणवत्ता वाला प्रिंट हमारी ऑनलाइन डेलीआर्ट शॉप से मँगवा सकते हैं।
पी.पी.एस. केवल प्रभाववादी कलाकार ही प्राकृतिक प्रकाश से प्रभावित नहीं थे। इन शानदार सुनहरे समय के चित्रों के माध्यम से एक कलात्मक यात्रा पर चलें!