जेकोबा वैन हीम्सकर्क एक डच चित्रकार, रंगित ग्लास डिज़ाइनर, और ग्राफ़िक कलाकार थीं जिन्होंने कई आधुनिक शैलियों में काम किया। वह खास तौर पर अमूर्त परिदृश्य और स्टिल लाइफ चित्रों के लिए जानी जाति थी।
डॉमबर्ग में अपनी आजीवन मित्र और संरक्षक, मारी तक वैन पूर्तफ्लीट के घर बिताई हुई गर्मियाँ उनके कलात्मक विकास का अहम हिस्सा साबित हुईं। 1908 की पहली गर्मी में उनकी मुलाक़ात अन्य कलाकारों से हुई, जैसे यान स्लूईटर्स, यान तूरुप, एलसी बर्ग, चार्ली तूरुप, पीएट मोंद्रियान और लोडविक शेल्फ़हौत, जिन्होंने उनके शुरुवाती कृतियों पर गहरा प्रभाव डाला ख़ासकर मोंद्रियान और शेल्फ़हौत। उस समय के ज़्यादातर कलाकारों की तरह जेकोबा भी ब्रह्मविद्या (थियोसॉफी) और मानवविज्ञान (एंथ्रोपोसॉफी) के दर्शन में रुचि रखती थीं, 1909 की सर्दियों से दौरान मोंद्रियान ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से पढ़ाया भी था। हालाँकि इस शुरुआती दौर की बहुत ही कम कृतियाँ आज पाई जाति हैं, किंतु उनमे स्पष्ट तौर पर एक चमकदार गुण झलकती है।
वैन हीम्सकर्क का धनवाद चरण काफ़ी संक्षिप्त रहा, मगर उसमे भी उन्होंने अपनी शैली की छाप छोड़ दी थी। जहाँ शुरुआती कृतियों में मुलायम रंग और भिकरी हुई रेखाएँ दिखती थी वही 1912 से 1914 के दौरान उनकी शैली स्पष्ट, काले रंग के सीमांकित क्षेत्र के भीतर बोल्ड रंगों में, और इकहरे रेखाओं में बदलती नज़र आई। यह अनुमान लगाना की उनकी कृतियाँ कितनी पुरानी हैं मुश्किल साबित होता है क्यूंकि वह स्वयं ही अपनी कृतियाँ ना तो दिनांकित करती थीं और ना ही उसके बारे में लिखती थीं। लेकिन मारी तक वैन पूर्तफ्लीट की लिखावट से यह स्पष्ट होता है कि उनके लिए रंग और रूप से जुड़ी ब्रह्मविद्या के सिद्धांत बेहद महत्वपूर्ण थीं, भले ही सैद्धांतिक व्याख्या उनके कार्य के कलात्मक सार को ढाँक दे।
आज का यह चित्र शायद उनके धनवाद कि कृतियों में सबसे शुद्ध कृति है। उस दौर के अन्य चित्रों के विपरीत, इसमें प्राकृतिक रूपों का कोई संकेत नहीं है — न तो लहरे, न कोई जैविक रेखाएँ — बस सभी तत्वों को विशुद्ध ज्यामितीय आकार और न्यूनतम परिप्रेक्ष्य तक घटा दिया गया है। इसी कारण यह डच धनवाद की सबसे ऊँची उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।
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पुनः पुनश्च - 1875 में शुरू हुई एक धार्मिक चलन ने 19वीं और 20वीं सदी में कला पर गहरा प्रभाव डाला। जानिए की कला और ब्रह्मवाद (थियोसॉफी) कैसे जुड़े हैं।