जैसा कि हमने कल कहा था, कि हम आम-तौर पर आधुनिक कला बहुत कम दिखा पाते हैं, लेकिन उससे भी कम, हमे आधुनिक फ़ोटोग्राफ़ी दिखाने का मौका मिलता है। तो आइए आज हम प्रस्तुत करते हैं फोटोग्राम 1 (6) 22.06.24, जो शानदार कलाकार अग्निएज़का सेजूद के कोरियोग्राफी फॉर एबसेंस की शृंखला से है (उनकी वेबसाइट और इंस्टाग्राम यहाँ देखिए)। वह इस फ़ोटोग्राफ़ का वर्णन कुछ इस तरह करती हैं:
"अँधेरा करके, मै प्रकाश सुग्राही कागज़ के रोल से एक टुकड़ा काट लेती हूँ। उसके बाद कागज़ को या तो दीवार पर या फर्श पर बिछा कर, उसपे अपना शरीर रख देती हूँ , फिर कुछ पल के लिए रोशनी को गिरने देती हूँ। एक बड़े एनलार्जर लाइट और कुछ छोटे लैंप की रोशनी का इस्तेमाल कर, मै सहज तरीक़े से उस जगह को कैद करती हूँ। जब मुझे ऐसा एहसास होता है कि वह पूरा हो गया है, तो मै उस कागज़ को मशीन में डाल, उसका केमिकल बाथ से निकलने का इंतज़ार करती हूँ।
मै अपने होने का एहसास उसी पल में कैद कर लेती हूँ। यह एक रहस्यमई रिवाज़ जैसा है, मानो मृत्यु और कामना का एक नृत्य। मै अपनी छाप उस कागज़ पर छोड़ देती हूँ, जो मेरे शरीर से भी अधिक समय जीवित रहेगा। थोड़ा सा प्यार का एहसास और थोड़ा मृत्यु का।
ऐतिहासिक सन्दर्भों की बात करूँ तो यह ईव्स क्लाइन की याद दिलाता है, जिन्होंने एक प्रदर्शनी रची थी जिसमे: महिलाएँ पेंट ब्रश के तौर पे, सामने दर्शक, क्लाइन ख़ुद एक सूट पहने, हाथों में सिगरेट लिए—एकदम शुद्ध, शारीरिक रूप से अक्षत। मैं उस प्रदर्शनी को उलट देती हूँ, हालाकि मै भी रंगों का इस्तेमाल नहीं करती। मै कागज़ को रोशनी से पेंट करती हूँ। मै एकांत और अंधकार में अपना काम करती हूँ। मै निर्देश नहीं देती—बल्कि ख़ुद ही साधन बन जाति हूँ, मै ही स्वयं शरीर हूँ, रोशनी हूँ और चित्र भी। भले ही प्रकाश सुग्राही कागज़ और इमल्शन धीरे-धीरे गायब हो रहे हों, मै जो उपलब्ध है उसी का इस्तेमाल कर अपनी कृतियाँ बनती हूँ।"
पुनश्च - 20वी सदी के कई कलाकारों ने फोटोग्राफी का इस्तेमाल कर परीक्षण किए हैं। यहाँ देखिए मैन रे द्वारा 10 अध्बुत रायोग्राफ़!
Agnieszka Sejud