क्लॉड मोने ने एक बार कहा था कि धुंध के बिना "लंदन एक सुंदर शहर नही होता। लंदन की शानदार व्यापकता, उसे उसकी धुंध के होने से ही मिलती है।" लंदन श्रृंखला पर काम करते समय मोने प्रतिदिन एक विनयशील रूटीन का पालन करते थे, जहाँ वह सुबह जल्दी उठ कर वॉटरलू ब्रिज को चित्रित करते थे और दोपहर होते ही चेरिंग क्रॉस ब्रिज की ओर अपना ध्यान केंद्रित कर देते थे। यह दोनों दृश्य उनके सेवॉय होटल के पाँचवी मंजिल पर स्तिथ कमरे से नज़र आते थे।
हालाकि वॉटरलू ब्रिज वाला चित्र 1903 का दिनांकित है, माना जाता है की इसकी शुरुआत साल 1900 में ही हो गई थी और वह दिनांकित तब हुई जब मोने के अनुसार वह सम्पूर्ण थी। उन्होंने अपने द्वारा चित्रित लंदन के नज़ारों को सुधारने का प्रयास, जिवर्नी के स्टूडियो में जारी रखा और उन्होंने ऐसे कई चित्र बनाए थे। वह व्यापारियों को अपने चित्र तब तक नहीं थमाते थे जब तक वह अपने कार्य से पूरी तरह संतुष्ट ना हों।
पुनश्च - मोने की सावधानी भरी प्रक्रिया, हमे एहसास दिलाती है की प्रभाववाद कोई हादसा नहीं बल्कि प्रकाश और नजरिये का एक सोचा समझा और प्रगतिशील पुनर्विचार था। हमारे फ्रेंच इंप्रेशनिज़्म मेगा ऑनलाइन कोर्स में आप और भी गहराई से जान सकेंगे कि मोने और उनके समकालीन कलाकारों ने आधुनिक कला को किस प्रकार बदल दिया।
पुनः पुनश्च - भूले बिसरे कलाकारों से लेकर महान उस्तादों तक, अगर कला संबंधित कहानियां आपको पसंद हैं, तो DailyArt मैगज़ीन न्यूज़लैटर को ज़रूर सब्सक्राइब करें!