साफ़ एवं जीवंत रंगों से बनी यह चमकदार कृति हार्वेस्टिंग, बेल्जियम की चित्रकार आना बोख़ के सबसे महत्वपूर्ण कृतियों मे से एक है। धूप में जगमगाते पौधा-घर के सामने—शीशे पर पड़ती रोशनी की तीव्रता को कम करने के लिए सूखे घास के तिनके से आवृत—एक युवा महिला तिनके से बुनी टोपी पहन कर फूल, फल, और बैर इकट्ठा करती दिखाई देती है। वह छोटी गोभी एवं बंध गोभी से भरे सब्ज़ियों के बगीचे के पीछे नज़र आती है जो गेंदे के फूलों से घिरा हुआ है। जिसको चित्रकार ने हरी वनस्पति में नम्र लाल बिंदुओं से स्पष्ट किया है।
प्रभाववादियों की विरासत का अनुसरण करते हुए बोख़, चित्र में व्यक्ति और परिप्रेक्ष्य के बीच की पारंपरिक दूरी को चुनौती देती हैं और चित्र में गहराई की संरचना पर पुनर विचार भी करती हैं। साथ ही पूरक रंगों और मानव आकृति की रचना के ज़रिए यह चित्र नव-प्रभाववाद के विचारों को दर्शाती है। इन सभी के बावजूद बोख़, तूलिका शैली में ख़ुद को अधिक आज़ादी देती हैं और प्राथमिकता एक सच्ची भावनात्मक प्रतिक्रिया को व्यक्त करने पर रखती हैं।
यह चित्र बोख़ के जीवन में एक नया मोड़ लेकर आया, जिसके चलते वह अपने पूर्व चित्रों की गहरे रंगों वाली रचनाओं से हटकर ग्रामीण जीवन ओर परिदृश्य के चित्रों की और बढ़ने लगीं। 1891 में ब्रसल्स के अग्रगामी संगठन लेस XX में पहली बार, और उसी साल सैलून दे इंडिपेंडेंट्स में प्रदर्शित हुआ यह चित्र, समाचार पत्रों द्वारा "भाव में बेहद समृद्ध और ऐसे पैमाने पर चित्रित जो किसी माहिल्य के लिए दुर्लभ है" कहलाया गया। यह टिप्पणी उस दौर के भेदभाव को दर्शाती है, जिसका सामना बोख़ और उनकी समकालीन कलाकार जैसे बर्थे मॉरिसॉट, मारी कसाट, जेन्नी मोंटिनी, और आना दे वेर्ट को करना पढ़ा था जिनकी कलात्मक पसंद और विषय दोनों काफ़ी हद तक स्वयं उनके जैसे ही थे।
प्रकृति और रोज़मर्रा की सुंदरता के प्रति संवेदनशीलता, हमारे वूमेन आर्टिस्ट 50 पोस्टकार्ड सेट में देखने को मिलती है, जिनमे उन महिला चित्रकारों की कृतियाँ शामिल हैं जिन्होंने फूल, बगीचे और ग्रामीण जीवन को देखने का हमारा नज़रिया बदल दिया।
पुनश्च - आना बोख़ की चमकदार कला को और गहराई से जानिए!