जब फिनलैंड के कलाकार अल्बर्ट एडलफ़ेल्ट ने द लक्ज़मबर्ग गार्डन्स बनाया तब उनको, पेरिस में रहते और काम करते दस साल से भी अधिक समय हो चुका था और साथ ही वह पेरिस की कला जगत में एक जानी-मानी हस्ती भी थे। इसके बावजूद यह चित्र उनके कार्यकाल में अनूठा माना जाता है: फ्रांस में इतना लंबा समय बिताने के बावजूद यह बड़े आकार का चित्र उनकी एक मात्र कृति है जिसमे उन्होंने स्वयं पेरिस को ही विषय के तौर पर चुना।
शैलीगत रूप से भी यह कृति विशिष्ट है। एडलफ़ेल्ट ने इसमें ऐसे तत्वों को संयुक्त किया है जिन्हें प्रभाववाद से जोड़ा जाता है, ख़ासकर के प्रकाश और विषमता के भाव को अत्युक्त करने में पूरक रंगों का इस्तेमाल। परंतु अन्य कई प्रभाववाद कलाकारों के विपरीत, उन्होंने इस कृति की प्रगति आहिस्ता की, जहाँ उन्होंने कभी कार्यालय तो कभी बाहरी अवलोकन के सहारे इस पर एक साल से भी अधिक समय तक काम किया। जब 1887 में यह चित्र प्रदर्शित हुआ तो आलोचकों द्वारा इसे सरहाना गया।
आज के समय, द लक्ज़मबर्ग गार्डन्स को फ़िनलैंड और पेरिस के बीच कलात्मक संबंध के चिह्न के तौर पर देखा जाता है, एक ऐसे समय पर जब फ्रांस की यह राजधानी अंतर्राष्ट्रीय कला जगत का केंद्र थी।
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