1878 के गर्मियों के मौसम में, जॉन सिंगर सार्जेंट, पेरिस के बोहेमियाई लैटिन क्वार्टर में अपना स्टूडियो छोढ़कर भूमध्यसागरीय टापू कैप्री में जा बसे, जो इटली में नेपल्स की खाड़ी के ठीक बाहर स्थित है। सार्जेंट के दौरे के समय, कैप्री यूरोपियाई और अमेरिकी पर्यटकों के बीच कम अज्ञात था, परंतु कलाकारों के बीच एक बेहद मशहूर स्थान था, जो उसकी खास सीनरी एवं आर्किटेक्चर यानी वास्तुशिल्प की ओर आकर्षित थे। सार्जेंट आगे जाके अपने बेहद सफल करियर की शुरुआत में, केवल 22 वर्ष के थे, जो फ़्रांसीसी पोर्ट्रेट चित्रकार एमिल अगस्त कैरोलस-दूरान के नेतृत्व में चार साल शिक्षित हुए। उन्होंने मरीना होटल में रहने का निर्णनय लिया और कई हफ़्तों तक सांता टेरेसा में स्थित एक वीरान मठ में इंग्लिश कलाकार फ्रैंक हाइड के स्टूडियो को साझा किया।
स्टेयरकेस इन कैप्री सार्जेंट के रंगों के गहरेपन और हल्केपन के बीच विषमता को लेकर दिलचस्पी को दर्शाता है और साथ ही वास्तुशिल्पीय इमारतों पर सूरज के प्रकाश के प्रभाव को भी। उन्होंने कई अध्ययनों में वास्तुशिल्पीय रूपों की ज्यामिति और सफेद सतह पर प्रकाश क्रीड़ा को लेकर परीक्षण किया, परंतु यह चित्र उनके इन प्रयोगों का सबसे साफ़, सुंदर और अमूर्त रूप मानी जाति है। सीधी चढ़ाई वाली पत्थर की एक लंबी सीड़ी निचले दृष्टिकोण से चित्रित है, वहीं हरे रंग के बेल, एक लतागृह पर लिपटे हुए हैं और उनके बीच आसमान का चमकीला नीला रंग दिखाई देता है। डिज़ाइन के कठोर ऊर्ध्वता के कारण सीड़िया पतली नज़र आती हैं, और तेज धूप चिकनी सतह पर गिरकर दीवार पर विकर्ण तीव्र विषमता बनाती है और पायदान पर छाया भी बिखेरती है। चित्र में लगभग पूरा स्थान वास्तुशिल्प ने घेरा हुआ है, जिसकी वजह से यह दृश्य सफेद रंग की एक योजना नज़र आती है। यह रंगों के हल्के-गहरेपन का एक सधा हुआ प्रयोग है, जहाँ मोती, चाँदी और भूरे रंगों की बारीकियों का इस्तेमाल किया गया है और परछाइयों में हल्के बैंगनी और नीले रंग की झलक भी मिलती है।
पुनश्च - केवल सुंदर और धूप से खिले दृश्य ही कैप्री का वह एकमात्र तत्व नहीं था जिसने इस कलाकार को मंत्रमुग्ध किया था। जॉन सिंगर सार्जेंट और रोज़िना फ़ेरारा के कैप्री रोमांस के बारे में ज़रूर पढ़िए।