जब मैंने इसे पहली बार देखा, तो मुझे इससे प्यार हो गया। क्या आपने कभी रिनपा स्कूल के बारे में सुना है?
रिनपा (या रिम्पा) स्कूल 17वी सदी के क्योटो से उभरी, जापानी चित्रकला की एक जीवंत और सजावटी शैली है। जो दरबारों के शास्त्रीय साहित्य से प्रेरित, प्रकृति की सुस्पष्ट, ग्राफ़िक चित्रणों के लिए जाना जाता था। जहाँ खनिज रंगों का, सुनहरे एवं चाँदी के पत्तों का, और हस्तलिपि का इस्तेमाल किया जाता था।
आज जो चित्र हम पेश कर रहे हैं, उसमे रिनपा स्कूल की खास तराशीकोमी यानी धब्बेदार-स्याही वाली तकनीक साफ़ झलकती है। साथ ही, इसमें कलाकार की पश्चिमी शैली की यथार्थवाद रुचि भी देखने को मिलती है। बेहद बारीकी से रची पेड़ों कि मुड़ती पत्तियाँ और घास, पतझड़ के दिनों की ठंडी हवा का एहसास कराती है। इसकी झलक साथ में लिखे शब्दों में भी देखने को मिलती है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह चित्र, साल 1816 में पतझड़ के आखरी दिनों में रचा गया था।
सकाई होइत्सु का जन्म एक समृद्ध और प्रभावशाली समुराई परिवार में हुआ था और इसी कारण उन्हें बेहतरीन और विशेष शिक्षा भी मिली जिसमे जापान के एडो दौर की विभिन्न चित्रकला शैलियाँ मौजूद थे। 1797 में वह एक वैरागी बन गए और मॉनसेन किशिन नाम को अपनाया जो इस स्क्रीन के मोहर और हस्ताक्षर में नज़र आता है।
पुनश्च - जापान कि दृश्य कविता की यह केवल एक झलक है; ऐसे और कई कृतियों को देखिए हमारे जैपनीज़ आर्ट 50 पोस्टकार्ड सेट में, जो ख़ासकर उनके लिए बना है जिन्हें शिष्टता और बारीकियां बेहद पसंद है ... अब इसपर 20% की छूट पाएँ!
पुनः पुनश्च - जापानी कला ऐसे सुशील दिखने वाली शानदार कृतियों से भरपूर है। नेत्सुके की विचित्र लघुचित्र की दुनिया को यहाँ देखिए!
Sakai Hōitsu