मतीस के चित्रों को जितना ज़्यादा देखो उतना समझ आता है की उन्हें 20वी सदी के सबसे क्रांतिकारी चित्रकारों में क्यों गिना जाता है। यकीन करना मुश्किल है लेकिन यह चित्र वाक़ई 1911 में बना था!
"लाल रंग मुझे कहाँ से मिला मुझे सच में नहीं पता। चीज़ें तभी असली लगती हैं जब मै उन्हें लाल में देखता हूँ।" मतीस ने यह स्वयं ही यह कहा था।
इस चित्र में उनका कार्यालय ही मंच बन जाता है : जहाँ उनके बनाए नए चित्र, मूर्तियाँ, और सेरामिक चमकदार रंगों में दिखाई देते है, जबकि दीवार और अन्य सामान लाल रंग के समंदर में डूबे नज़र आते है। चित्र के बीचों बीच बिना कांटो की एक पुरानी पेंडुलम वाली घड़ी रखी है मानो जैसे कि कलाकार की दुनिया में समय ठहर गया हो। चित्र में जो खींची हुई रेखाएँ नज़र आती हैं वह असल में पीले रंग की फीकी परत है जिसके ऊपर मतीस ने लाल रंग लेपा। इसी रहस्यपूर्ण ख़ालीपन से आकृतियाँ बनती हैं, चित्र मे गहराई आती है और पूरे कमरे को एक परिभाषा मिलती है।
रंगों का इस तरह इस्तेमाल करने का रवैया, आने वाली पीढ़ी के कलाकारों पर असरदार साबित हुआ। इसे सीधे तौर पर कलर फील्ड चित्रकारिता का पूर्वज माना जाता है, जिसको उदाहरण मार्क रोथको और केनेथ नॉलैंड जैसे कलाकार हैं। फ्रैंक स्टेला ने भी इस विचार को अपनाया, जब उन्होंने कैनवास की खाली जगहों को चित्र के ढांचे के तौर पर इस्तेमाल किया। मतीस ने दिखाया की औपचारिक तरीकों से विपरीत रंगों कि विभिन परतें कैसे चित्र में गहराई लाती है और उन्हें जीवंत बनाती हैं।
पुनश्च - अगर आप समझना चाहते हैं की मतीस जैसे कलाकारों ने रंग, स्थान और रचना को देखने का हमारा नज़रिया किस तरह बदला, तो मुफ्त के इस कोर्स में ज़रूर शामिल हों : चित्रों को किस नजरिये से देखें ।
पुनः पुनश्च - यह है हेनरी मतीस के बनाए 10 चित्र! फाववाद के उस्ताद मतीस को और अच्छे से जानें।