स्टॉकहोम में जन्मे यूजीन यानसन ने अपना पूरा जीवन अपने पसंदीदार शहर में गुज़ारा। हालाकि वह बहुत कम यात्रा करते थे, फिर भी वह स्वीडन के सबसे मूल चित्रकारों में माने जाते हैं। उस समय के अग्रणी इन्नोवेटर से अलगाव के बावजूद भी, उनकी कृतियाँ यूरोप के कई कला धाराओं के साथ संबंध का संकेत देती हैं।
अपने युवावस्था में, गुज़ारा चलाने के लिए स्थिर-चित्र बनाने के बाद, यानसन को अपनी वह शैली नज़र आई जो आगे चलकर उनके जीवन को प्रतिभाषित कर देती है। उन्होंने एक मुख्य रंग चुना—नीला—और इसे अपनी निजी अभिव्यंजक शैली का हिस्सा बना कर अपने पसंदीदा विषयों को चित्रित किया: जो कि स्टॉकहोम शहर के पैनोरमिक दृश्य थे। मरियाबर्गेट के ऊपर स्तिथ अपने कार्यशाला से वह शहर के टापू और जलमार्ग के मंत्रमुग्ध कर देने वाले चित्र बनाने लगे, जो रात की रोशनी में एक अद्भुत नीली चमक प्रदान करते हैं। संगीत उनकी प्रेरणा का एक अहम स्रोत था। उनके जानकार और मित्र यह कहा करते थे की कैनवास पर चित्रित नीले टोन में उनके पियानो बजाने की गूँज महसूस होती थी। शायद इसी कारण उन्होंने अपनी ऐसी चित्रित कई कृतियों को अपने प्रिय संगीतकार चॉपिन के गीत पर आधारित, नॉक्टर्न्स का नाम दिया।
शुरुआती दौर में आलोचकों और दर्शकों ने, उनकी विशाल और अग्रसर कृतियों को शंका की नज़र से देखा। सिर्फ़ कुछ ही लोगों ने उनकी इन, दो मीटर लंबी कृतियों को ख़रीदा। इसके बावजूद भी यानसन डटे रहे। निडर, तीव्र और अटल रहकर वह अपनी परिकल्पना को दृढ़ता और अनुशासन से जारी रखते रहे। 1898 में आख़िरकार जाकर उनके जीवन में एक मोड़ आया जब वह धनी कलेक्टर, अर्नेस्ट थियल से मिले। थियल उनके सहायक बने और यानसन को आर्थिक रूप से सुरक्षा दी। 1904 आते-आते, यानसन ने स्टॉकहोम पर आधारित अपना आखरी "नीला" चित्र पूरा किया।
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