सिलाई करती एक महिला का आंतरिक दृश्य by Marie Krøyer - लगभग 1900 - 46 x 38.2 से. मी. सिलाई करती एक महिला का आंतरिक दृश्य by Marie Krøyer - लगभग 1900 - 46 x 38.2 से. मी.

सिलाई करती एक महिला का आंतरिक दृश्य

कैनवास पर तेल • 46 x 38.2 से. मी.

  • Marie Krøyer - 11 June 1867 - 25 May 1940 Marie Krøyer

    लगभग 1900

चलिए आज चलते हैं डेनमार्क के सुंदर शहर स्कागेन की ओर।

मारी त्रिएपके क्रॉयर आल्फ़्वेन, या आम तौर पर मारी क्रॉयर के नाम से जाने जानी वाली कलाकार जिसकी कृति हम आज पेश कर रहे हैं, डेनमार्क के फ़्रेडरिक्सबर्ग में मारिया मार्था मथिलड़े त्रिएपके के नाम से पैदा हुई थीं। बचपन से ही मारी ने कला में गहरी रुचि दिखाई और पेंटर के तौर पर शिक्षित होने का दृढ़ निश्चय किया—एक ऐसी अभिलाषा जो उस समय की महिलाओं के लिए बेहद कठिन थीं। दृढ़, प्रतिभा और अपने माता पिता के समर्थन के कारण वह कोपेनहागन में कार्ल थॉमस और क्रिस्टियन ज़ार्टमैन के निजी स्टूडियो में पढ़ाई करने में सफल रहीं। मारी को काफ़ी प्रोत्साहन मिला बेरथा वेगमैन से, जो एक मशहूर पोट्रेट कलाकार थी और जिनके लिए मारी ने 16 वर्ष की उमर में एक मॉडल की भूमिका भी निभाई, साथ ही डेनमार्क में सांस्कृतिक मंत्रालय के आंद्रेयस पीटर वाइस से भी।

पेरिस में मारी ने पिएर प्यूवी द शवान के चित्रालय में आना एंकर के साथ पढ़ाई करी। एंकर, जो डेनमार्क वासी थी और स्कागेन की ही रहने वाली थी, उनकी आजीवन सहेली रही। मारी ने गुस्ताव कुरतुआ और फ़िलिप रॉल के स्टूडियो में भी अध्ययन किया।

आम जनता मारी के जीवन को लेकर हमेशा से मोहित रही। मशहूर चित्रकार पी.एस. क्रॉयर के साथ, वह कोपेनहेगन की सांस्कृतिक अभिजात वर्ग का हिस्सा बनीं और उस समय के अख़बार और पत्रिकाओं में इस जोड़े की खूब चर्चा होती थी। इन सब के बावजूद, मारी की पहचान केवल एक सुंदर महिला और एक जाने माने कलाकार की पत्नी के तौर पर नहीं थी। डेनमार्क में पुरुषों के बराबर महिलाओं की वृत्तिक कलात्मक परीक्षण में प्रवेश के संघर्ष को लेकर, वह अग्र स्थान पर खड़ी रहीं और एक स्वतंत्र कलाकार के रूप में अपनी पहचान बनाने की महत्वाकांक्षा रखती रहीं।

दुर्भाग्य से यह महत्वाकांक्षा कभी भी पूरी तरह साकार नहीं हो पाई। 1889 में, पी.एस. क्रॉयर से विवाह के बाद, मारी ने समय के चलते चित्रकला को त्याग दिया। इसके बदले उन्होंने अपनी रचनात्मक ऊर्जा को इंटीरियर सजावट और डिज़ाइन की ओर मोड़ दिया। हालाकि इन क्षेत्रों में उन्होंने मौलिक एवं विशिष्ट रचनाएँ बनाई परंतु उन्हें कभी भी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं किया। इसी के चलते उन्हें अपने जीवन के दौरान कलात्मक मान्यता हासिल नहीं हो पाई। 

1901 में, पी.एस. क्रॉयर की मृत्यु के बाद, मारी काफ़ी हद तक सार्वजनिक नज़रों से ओझल हो गईं। हाल ही के सालों में उन्हें फिर से खोज निकाला गया और उनके अपनी रचनाओं के लिए उन्हें मान्यता मिली—विशेष रूप से इंटीरियर सजावट और डिज़ाइन में प्रगतिशील योगदान के लिए। 

क्रॉयर और उनकी उज्जवल कला के पीछे की कहानी को यहाँ देखिए!