आज म्यूनिक के लेनबाख़हाउस म्यूजियम के संग्र के साथ हमाराआखरी रविवार है। हमे आशा है आपको यह साझेदारी पसंद आई होगी!
पेरिस में एर्मा बॉसी: वह अक्सर मौन्मात्रे में कैफ़े, रेस्तोरां एवं कैबरे जाति थीं, ऑपरा और सर्कस भी जाति थीं और ऐसे शहरी रूपांकनों में डूबी रहती थीं। असल में हमे पता भी नहीं है की यह सब वास्तव में हुआ भी था या नहीं—इस्त्रिया में जन्मी इस चित्रकार के बारे में इतना कुछ है, जो हमे नहीं पता। परंतु एक चीज़ जो स्पष्ट रूप से सच है, वो यह है कि 1909 से लेकर 1911 तक वह न्यू आर्टिस्ट्स एसोसिएशन म्यूनिक से जुड़ी, जहाँ उन्होंने अपने विचारों को लेकर चर्चा भी की और अपने काम को प्रदर्शित भी किया। एसोसिएशन की 1909 के आखरी दिनों के प्रदर्शनी में, उन्होंने कैफ़े ब्लांच,पेरिस नाम का यह चित्र प्रस्तुत किया—यह संभव है कि आज की हमारी प्रस्तुति, वाक़ई में वही चित्र हो।
कैफ़े के जीवंत दृश्य, आधुनिक चित्रकला का एक अहम हिस्सा थे। मगर बॉसी ने इसे एक अलग दृष्टि से देखा, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने एक शांत स्वभाव का दृश्य चित्रित किया। इस दृश्य में दो लोग बातचीत में मगन नज़र आते हैं: पर से आभूषित टोपी पहनी एक महिला और उनका साथी, जिनका लिंग स्पष्ट रूप से पहचान में नहीं आता है। एक वेटर भी दृश्य में पीछे खड़ा नज़र आता है।
इस चित्र में शांति के बावजूद, इसके वर्णन में एक जबरदस्त ऊर्जा महसूस होती है। बॉसी विभिन्न दृष्टिकोण को लाकर एक साथ जोड़ते हैं: एक मिटती हुई रेखा चित्र के बाईं ओर सीढ़ियों के पास से गुज़रती मंच से जा मिलती है। कईं लंपों की कतार नज़र को गहराई की ओर ले जाति है और चित्र में दूसरी रेखा की भूमिका निभाती है। इन सभी के विपरीत, चित्र के बीच का हिस्सा प्रमुख आकारों और रंगों से रहित नज़र आता है। जगमगाते गहरे रंग और जीवंत हल्के रंग एक दूसरे के निकट रखे गए हैं जिसके कारण चित्र की चमक और बढ़ जाति है। इस शांत से अंदरूनु दृश्य को बॉसी एक प्रगीतिशील और उत्तेजक अनुभव में बदल देती हैं।
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Erma Bossi