अल्जीरिया में जन्मे, लूसियन लेवी बचपन में ही फ्रांस लौटे और अपनी कलात्मक शिक्षा पूरी की। अनुमान है की 1882 के आस पास अपनी शिक्षा पूर्ण करने से पहले ही उन्हें पेरिस सैलून में जगह मिल गई थी और वहाँ 1889 तक वह अपनी कृतियाँ नियमित रूप से प्रदर्शित करते रहे। लेकिन पेरिस में अपने आशाजनक करियर के चरम पर वह सब छोड़, कोट दे'अज़ूर चले गय और छह वर्षों तक कला की दुनिया से तिरोहित रहे।
1895 में, अपने 30वे जन्मदिन के आसपास लेवी, वेनिस और फ्लोरेंस की ओर निकल पड़े। वहाँ, लियोनार्डो डा विंची और पुनर्जागरण के उस्तादों की कला, उनके ख़ुद की कला के लिए परिवर्तनकारी साबित हुई। इस यात्रा ने कला की और उनके रुझाव को फिर से पुनर्जीवित कर दिया और वह वापिस पेरिस की और निकल पड़े, जहाँ उन्होंने अपनी माँ का नाम अपनाया और लेवी-धुर्मर कहलाने लगे। उन्होंने अपना स्टूडियो गुस्ताव मोरो के स्टूडियो के पास स्थापित किया। उस दौरान कला आलोचकों ने उन्हें ना सिर्फ़ नवोदित कहा बल्कि एक उस्ताद भी, और साथ ही उनकी तुलना लियोनार्डो, बॉटीचेली और मेमलिंग से भी करी।
राज-हंस सदियों से ही, कभी धनाढ्य तो कभी असंगत का चिह्न माना जाता रहा है। कई बार इसका मतलब मर्दानगी से भी जोड़ा गया—ख़ासकर यूनानी मिथक में जहाँ लेडा को आकर्षित करने के लिए ज़्यूस ख़ुद को एक हंस में परिवर्तित करते हैं या फिर जर्मन मिथक में जहाँ वल्काइरी हंस का रूप ले सकते थे। दूसरी ओर हंस पवित्रता, सुंदरता, सौम्यता, प्रेम और संतुलन का भी प्रतीक माना जाता है। इस चित्र का भले ही कोई प्रतीकात्मक अर्थ ना हो लेकिन यह जैसा भी है बेहद सुंदर है।
पुनश्च - कुछ कलाकृतियां समझने ओर व्याख्या करने से परे हैं; वह केवल हमे रुक कर देखने का न्योता देती हैं। अगर आपको ऐसे शांत एवं सुंदर दृश्य पसंद हैं, तो हमारे सी, शिप्स & बीचेज़ 50 पोस्टकार्ड सेट को ज़रूर देखिए।:)
पुनः पुनश्च - कला इतिहास में सबसे बेहतरीन झील के चित्रों की छोटी सी यात्रा लीजिए!
Lucien Lévy-Dhurmer