आज वसंत ऋतु के पहले दिन पर हम एक निर्मल स्कैंडिनेवियाई मैदान प्रस्तुत करते हैं जो नरम प्राकृतिक रोशनी के तले सफेद फूलों से ढका हुआ है। यह चित्र हाराल्ड सोलबर्ग की संवेदनशीलता को दर्शाता है, जो नॉर्वे में रोरोस के आस पास के उत्तरी परिदृश्य कि ठहरी हुई सुंदरता का एहसास दिलाते हैं। चमकदार ठंडे आकाश के तले, हरा भरा घास का मैदान, फूलों के हल्के चादर सा फैलता जाता है। दर्शक को रंगों में अभिभूत करने कि बजाय, इस चित्र कि ख़ासियत: हल्के सफेद, मद्धम हरे और कोमल रोशनी में मिलती है, जो एक ऐसे संसार का एहसास देती हैं जो अभी अभी जाग रहा है।
वसंत के पहले दिन के लिए यह चित्र एकदम सटीक है। यहाँ वसंत अचानक से फूटता हुआ दृश्य नहीं है बल्कि एक वादे जैसा है—एक ऐसा ठहराव का पल जो बीते समय और आने वाली शुरुआत के बीच एक संतुलन बनाए रखता है। ज़मीन अभी भी पूरी तरह रंगों से भरी नहीं है फिर भी ज़िंदगी साफ़ तौर पर मौजूद है।
सोलबर्ग 20वी सदी में नॉर्वे के सबसे विशिष्ट चित्रकारों में से एक थे। उनकी कृतियों में उत्तरी परिदृश्य के प्रति उनका गहरा लगाव साफ़ झलकता है। नव्य रूमानीवाद से संयुक्त, सोलबर्ग ने प्रकृति को यथार्थवादिता से नहीं पेश किया बल्कि उसके भीतर के भाव और आध्यात्मिक अनुनाद को बताने का प्रयास किया। कला के बड़े केंद्रों से दूर, उन्होंने अपनी एक अलग निजी शैली विकसित करी जिसमे परिदृश्य सिर्फ़ दृष्टि ही नहीं बल्कि शांति, आत्मविश्लेषता और महिमा की भावनात्मक अवस्थाएँ बन जाते हैं।
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