एक पहाड़ी ,गिवर्नी by Theodore Robinson - 1887 - 41.28 × 33.02 से.मी. एक पहाड़ी ,गिवर्नी by Theodore Robinson - 1887 - 41.28 × 33.02 से.मी.

एक पहाड़ी ,गिवर्नी

कैनवास पर तेल • 41.28 × 33.02 से.मी.

  • Theodore Robinson - June 3, 1852 - April 2, 1896 Theodore Robinson

    1887

थियोडोर रॉबिन्सन अमेरिकी प्रभाववाद की पहली पीढ़ी के सबसे अहम कलाकारों में से एक थे। आज का यह चित्र उन्होंने उस समय बनाया जब वह पहली बार उस गाँव में रहे, जहाँ कुछ साल पहले क्लॉड मोने आकर बस चुके थे। उसी साल गर्मियों में, रॉबिन्सन उन गिने चुनें कलाकारों में से एक थे जिन्होंने गिवर्नी आर्ट कॉलोनी की नीव रखी। हालाकि वह औपचारिक तौर पर कभी भी मोने के शिष्य नहीं रहे, परंतु दूसरे कलाकारों की तुलना में, रॉबिन्सन ने मोने के बेहद करीब रहकर काम किया और बाहरी परिदृश्य को चित्रित करने की उनकी दृष्टिकोण को अपनाया। उसी दौरान, रॉबिन्सन ने प्रभाववाद में अपनी ख़ुद की अनोखी छाप भी छोड़ी। उस दौर के अन्य अमेरिकी कलाकारों के समान, वह जेम्स मैक्निल व्हिसलर और एस्थेटिक चलन से काफ़ी प्रभावित थे, जिसने सतह, पैटर्न और योजना को लेकर उनकी जागरूकता बढ़ाई। 

यह दोहरा प्रभाव इस चित्र में साफ़ झलकता है। एक तरफ़ यह चित्र एक प्लेन-एयर  यानी खुली हवा में चित्रकारी का अध्ययन है जहाँ: चमकती रोशनी, दिन की उष्णता और मैदान पर विभिन्न प्रकार के हरे और गेरू रंग, जो बिखरे ब्रश स्ट्रोक और ताज़े रंगों के ज़रिए दिखाए गए हैं। दूसरी तरफ़, इस रचना की बनावट बहुत सोची-समझी नज़र आती है। खेतों की चौड़ी और तिरछी पट्टीयां, पहाड़ी से नीचे आती दिखाई देती हैं और एक सीधी हरि पट्टी पर आकर अचानक रुक जाति हैं, जिससे पूरे चित्र में एक मज़बूत सजावटी लए बनती है। यह चित्र एक जगह के आलेख के रूप में एवं विभिन्न आकृतियों के सावधानीपूर्वक व्यवस्था के रूप में भी देखा जा सकता है। विचार और रूप के बीच इस तनाव में, रॉबिन्सन की वह खास शैली उभरने लगती है जो आगे चालकर उनके परिदृश्यों की पहचान बन जाती है। 

कल के चित्र के लिए तैयार रहें, क्यूंकि कल हम पेश करने वाले हैं एक शानदार कृति ... ख़ुद क्लॉड मोने की! :)

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