1915 में हिल्मा अफ़ क्लिंट ने द डव यानी वह फ़ाख़ता नामक चित्र बनाने का काम शुरू किया, यह उनके जीवन के सबसे मुख्य काम पेंटिंग्स फॉर द टेम्पल श्रृंखला के अखरी हिस्सों में से एक थी, जिसमे 1906 से 1915 के बीच बने 190 चित्र शामिल थे। उनकी धारणा थी की यह चित्र बनाने की ज़िम्मेदारी उन्हें आध्यात्मिक शक्तियों से मिली थी जिन्हें वह "हाई मास्टर्स" कहती थीं। उनका कहना था कि यह शक्तियाँ उनसे सीयंसेज़ यानी बैठक और स्वचालित लेखन एवं ड्राइंग के ज़रिए वार्तालाप करती थीं, एक ऐसी प्रक्रिया जो अध्यात्मवादी और ब्रह्मविद्या संबंधित गुट में आम बात थी, जिनके बीच उनका उठना बैठना था। इन चित्रों को एक सर्पिल आकार के मंदिर में रखा जाना था, जो उनके जीवनकाल में कभी बन नहीं पाया और अफ़ क्लिंट स्वयं चाहती थीं की उनके मृत्यु के दशकों बाद यह सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित न किया जाए। यही एक कारण है कि उनकी इस श्रृंखला को पश्चिमी अमूर्त कला की सबसे शुरुआती उदाहरणों में गिना जाता है, जो प्रसिद्ध चित्रकार काडिंस्की के अमूर्त कृतियों से कई साल पहले घटित हुई।
द डव 14 चित्रों से एकमत हुई है जो दो अलग-अलग सेट का हिस्सा थे, जिनमे से एक 8 चित्रों वाली, सैंट जॉर्ज श्रृंखला का हिस्सा थी। इसमें, ड्रैगन का वद्ध करने वाला संत एक व्यक्तिगत रूप बन जाता है: अफ़ क्लिंट सपष्ट रूप से कहती हैं कि संत जॉर्ज उनका प्रतिनिधित्व करते हैं, और ड्रैगन उन बुराइयों का प्रतीक है जिन्हें उन्हें दूर करना है, जो ब्रह्मविद्या विचारों की प्रतिध्वनि है। यह चित्र इसी को दर्शाता है: लाल पृष्ठभूमि पर, रचना के केंद्र में एक हृदय स्थित है, जिसमे से दो क्रॉस निकल रहे हैं। हृदय के भीतर, संत जॉर्ज एक वृत्त के ऊपर खड़े हैं, जो एक अंडाकार आकृति के भीतर रखा गया है, नीचे बाईं ओर दो डरावने और दुष्ट चेहरे उनकी ओर देख रहे हैं, जो तिरछी, घूमती हुई रेखाओं के माध्यम से ड्रैगन तक ऊर्जा पहुँचाते हुए दिखाई देते हैं।
उनकी एक और अद्भुत कृति हमारे 2027 साप्ताहिक प्लैनर के कवर पर चित्रित है! यह अब 25% छूट के साथ प्री-सेल में उपलब्ध है, जो केवल सीमित मात्र में ही उपलब्ध है! :)
पुनश्च - क्या आप जानते हैं की अफ़ क्लिंट की कलात्मक खोजों में और एक विश्वप्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक के विचारों में, काफ़ी समानताएँ थीं? देखिए कि हिल्म अफ़ क्लिंट और कार्ल युंग की कला और विचार किस तरह आपस में जुड़े हुए थे!