नृत्य करती परियाँ by August Malmström - 1866 - 90 × 149 से.मी. नृत्य करती परियाँ by August Malmström - 1866 - 90 × 149 से.मी.

नृत्य करती परियाँ

कैनवास पर तेल • 90 × 149 से.मी.

  • August Malmström - 14 October 1829 - 18 October 1901 August Malmström

    1866

डरावनी कहानियों का समय आ गया है!

इस चित्र, डांसिंग फ़ैरीज़  यानी नृत्य करती परियाँ, में स्वीडिश चित्रकार अगस्त माल्मस्ट्रोम एक धुँधली, चाँदनी परिदृश्य को अलौकिक जादुई दृश्य में परिवर्तित कर देते हैं। धुँधली परियाँ पानी के ऊपर मँडराती और तृणभूमि में नृत्य करती नज़र आती हैं, उनकी पारदर्शी आकृतियाँ मानो सुबह की धुँध से निकलती प्रतीत होती हैं। उनमे से एक पानी की सतह की ओर इस तरह झुकी है मानो स्वयं अपना ही प्रतिबिंब पकड़ने का प्रयास कर रही हो। यह बात यहाँ स्पष्ट हो जाती है की माल्मस्ट्रोम नॉर्डिक इतिहास, पौराणिक कथा और लोक कथाओं से बेहद प्रभावित थे। 

परंतु यह सुंदर जीव इतने भोले नहीं थे जितना यह दिखने में लगते हैं। स्वीडिश लोक कथाओं में एल्फ़्स और परियों का संबंध अक्सर वन, पहाड़ियों, तृणभूमि और अन्य जंगली स्थानों के साथ होता था और इनसे सामना होना घातक साबित हो सकता था। उनको सुंदर एवं आकर्षक माना जाता था परंतु वह अप्रत्याशित और जल्द ही नाराज़ होने के लिए भी जाने जाते थे, साथ ही यह भी मान्यता थी कि उनका अनादर करने वालों के लिए वह दुर्भाग्य लाने के भी काबिल थे। स्कैंडिनेवियाई लोग ख़ुद को और अपने मवेशी को उनके प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए एल्वकोर्स  ("एल्फ क्रॉस") नामक चिह्न का प्रयोग करते थे। माल्मस्ट्रोम इन पुरानी धारणाओं को 19वी सदी के रूमानी सम्मोहन से जोड़ते हैं, जिसमे रहस्यमय और अनियंत्रित प्रकृति के प्रति विशेष आकर्षण था, जिससे उन्होंने एक ऐसा परिदृश्य बनाया जो सुंदर भी है और बैचेन कर देने वाला भी—धुँध में विलीन परियाँ भले ही दिखने में नाज़ुक लगे परंतु उनका संबंध एक ऐसी दुनिया से है जिसमे मनुष्य अपने जोखिम पर ही क़दम रखता है। 

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