1871 के अगस्त में, मुख्य रूप से यूनाइटेड किंगडम में रहने वाले अमेरिकी कलाकार जेम्स ऐबॉट मैकनील व्हिसलर ने नॉक्टर्न : ब्लू एंड सिल्वर - चेल्सी , को चित्रित किया, जो 52 नॉक्टर्न कृतियों की शृंखला में पहली कृति थी (ऐसी रचनाएँ जिनमें संध्या के धुँधले एवं सीधे प्रकाश की अनुपस्थिति में चित्रित परिदृश्य व्यक्त किए गए थे)।
अपने पहले चित्र के लिए, व्हिसलर ने महोगनी लकड़ी का पैनल चुना जिसके ऊपर पहले से ही सफेद पेंट की एक परत चढ़ी हुई थी, उस पर गहरे रंग की एक और परत लगा कर उन्होंने लकड़ी की सतह को और चिकना बना दिया। नॉक्टर्न के लिए लकड़ी के पैनल का चयन करना एक व्यावहारिक और सटीक निर्णय था; इसकी चिकनाई, बुनावट की कमी, और कठोर, अनावशोषी गुण के चलते यह रंगों की पतली परतों के समान रूप से लगाने के लिए एक बिल्कुल समतल सतह प्रदान हुई। (व्हिसलर बाद में चमकदार रंग की इन पतली परतों को "सॉस" कहते थे।) पैनल के कारण कलाकार को रचना की सतह पर रंगों को प्रबलता से घिस कर सुधार करने का अवसर भी मिलता था, कैनवास में पाई जाने वाले लचीलेपन के बिना, जो इस एकीकृत "इनेमल" सतह के लिए बिल्कुल आदर्श था जिसका ज़िक्र व्हिसलर अक्सर करते थे। हालांकि इसकी अत्यधिक चिकनी सतह के कारण रंग सूख जाता था और स्पष्ट रूप से ब्रश के चिह्न दिखाई देते थे, जिसने उस वायुमंडलीय विसरण और गहराई को सीमित रखा जिसे उन्होंने बाद में कैनवास पर पेंट की परतों और उन्हें आंशिक रूप से हटाकर हासिल किया था।
आखिरकार अपने प्राकृतिक बनावट और सोखने की क्षमता के कारण कैनवास उनके अधिकांश नॉक्टर्न चित्रों के लिए पसंदीदा विकल्प बन गया, इसके चलते उन्हें चित्र के अंतिम स्वरूप पर बेहतर नियंत्रण मिलता था।
आप फ़िलहाल इस बेहतरीन कृति को वैन गो संग्रहालय की व्हिसलर. डैनडी एंड डिसरप्टर प्रदर्शनी में देख सकते हैं। अगर आप ऐम्स्टरडैम में हों तो इसको देखना ना भूलें!
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James Abbott McNeill Whistler