जैसे की आपने महसूस किया होगा कि, यह महीना Daily Art की तरफ़ से महिला कलाकारों को समर्पित है। आज भी कुछ ऐसा ही है। :) इस महिला इतिहास महीने का आनंद लीजिए!
एलिजाबेथ नॉर्स ने सिन्सिनाटी की कला अकादमी से पढ़ाई पूरी की और जाकर पेरिस में बस गईं, जो यूरोप की कला की राजधानी मानी जाति थी। 1895 में, उन्होंने आत्मविश्वास के साथ 'सोसाइटे नाशियोनल दे बो-आर्टस' में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार किया, जो की प्रगीतिशील कलाकारों का एक संगठन था। सरकारी सैलॉन प्रदर्शनी की रूढ़िवादी सोच और कठोर जूरी प्रणाली से असंतुष्ट, उन लोगों ने उसके विकल्प एक नया सैलॉन स्थापित किया जहाँ नॉर्स नियमित तौर पर अपनी कला की प्रस्तुति करती रहीं।
नॉर्स का करियर, विश्व युद्ध-1 के दौर से पहले के अन्य प्रवासी कलाकारों जैसा था, लेकिन उनके कुछ पहलू अनोखे भी थे। मैरी कस्साट और सेसिलिया बो जैसी वो चुनिंदे महिला कलाकारों में से एक थी जिनके काम को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली, और उन्हें भी उन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा जो पुरुष कलाकारों से अपरिचिन थी। सबसे पहले तो उन्हें अपनी योग्यता को साबित करना पड़ा, क्यूंकि उस दौर में चाहे महिलाएँ कितनी भी प्रतिभाशील क्यों ना हों उन्हें शौकिया कलाकारों के तौर पर देखा जाता था जो अंततः या तो शादी शुदा हो जायेंगी या अध्यापिका बन एक कलात्मक विरासत नहीं छोड़ पाएंगी। एक पेशेवर कलाकार की हैसियत पाने के हेतु उन्हें पुरुष जूरी से मान्यता प्राप्त करने की ज़रूरत थी जो सैलॉन और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों के हिस्से थे। साथ ही उन कला आलोचकों से सकारात्मक समीक्षा मिलनी भी ज़रूरी थी जो ज़्यादातर पुरुष ही होते थे। एक विक्टोरियन महिला होने के नाते ऐसे संगठनों में घुल मिल कर अपना करियर आगे बढ़ाने का अवसर उनके लिए आसान नहीं था ; खासकर पेरिस की कैफ़े संस्कृति से भी वो वंचित रहीं जो उस समय कला-जगत का अहम हिस्सा था। इन बाधाओं की भरपाई उन्होंने अपने परिवार के पूर्ण समर्थन और अपने महिला मित्रों के गिरोह से की, वह महिलाएं जो उनके काम की प्रशंसक थीं, उसे प्रचारित करती थीं और खरीदती भी थीं।
इस अनोखी महिला के बारे में और जान ने के लिए @DailyArtMag पर यह लेख पढ़े, एलिजाबेथ नॉर्स : "निसंदेह अमरीका की प्रमुख महिला कलाकार"।