जंगल से घिरा चाँदनी रात का परिदृश्य, तालाब और कुटिया के द्वार पर खड़ी आकृति सहित by Thomas Gainsborough - १७८१–८२ - २७.९ × ३३.७ सेंटीमीटर जंगल से घिरा चाँदनी रात का परिदृश्य, तालाब और कुटिया के द्वार पर खड़ी आकृति सहित by Thomas Gainsborough - १७८१–८२ - २७.९ × ३३.७ सेंटीमीटर

जंगल से घिरा चाँदनी रात का परिदृश्य, तालाब और कुटिया के द्वार पर खड़ी आकृति सहित

काँच पर पारदर्शी तैलचित्र • २७.९ × ३३.७ सेंटीमीटर

  • Thomas Gainsborough - 1727 - August 2, 1788 Thomas Gainsborough

    १७८१–८२

थॉमस गेंसबरो, जिनका जन्म १७२७ में सफ़ोक में हुआ था (मृत्यु १७८८), एक अंग्रेज़ परिदृश्य तथा चित्र-प्रतिमा कलाकार थे। वे रॉयल अकादमी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उनके प्रारम्भिक प्रभावों में विलियम होगार्थ शामिल थे, जबकि बाद में एंथनी वैन डाइक (जो इंग्लैंड के चार्ल्स प्रथम के चित्र-प्रतिमाओं के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं) से वे विशेष रूप से प्रभावित हुए। १७५९ में वे सफ़ोक से बाथ चले गए और १७७४ में बाथ से लंदन आ बसे। यहीं, १७८० के दशक के दौरान, उन्होंने काँच पर चित्र बनाने की अपनी तकनीक विकसित की तथा "शोबॉक्स" नामक एक उपकरण का उपयोग किया, जिसमें चित्रों को पीछे से मोमबत्तियों की रोशनी से प्रकाशित किया जाता था। इससे एक दीप्तिमान प्रभाव उत्पन्न होता था, जो विशेष रूप से रात्रिकालीन दृश्यों के लिए अत्यंत उपयुक्त था। इन चित्रित पारदर्शी चित्रों को डिब्बे के सामने की ओर लगे आवर्धक लेंसयुक्त छोटे झरोखे से देखा जाता था। रचना के विभिन्न तत्वों और पीछे से आने वाले प्रकाश के संयुक्त प्रभाव से प्रकाश का ऐसा नाटकीय चित्रण सामने आता था, जैसा हम उसे वास्तविक जीवन में देखते हैं।

रात्रि के समय पर आधारित यह चित्र एक छोटे से तालाब के किनारे स्थित एक छोटी-सी कुटिया को दर्शाता है, जो खिड़की और खुले द्वार से बाहर आती रोशनी के कारण सजीव प्रतीत होती है। ऐसा लगता है मानो हमारी प्रतीक्षा की जा रही हो—द्वार पर खड़ी एक आकृति हमें भीतर आने के लिए आमंत्रित करने की प्रतीक्षा कर रही है, जहाँ एक आरामदायक और गर्मजोशी से भरा छोटा-सा घर दिखाई देता है। यह निश्चित रूप से कहना कठिन है कि चिमनी के ऊपर दिखाई देने वाला सफ़ेद गुच्छा आकाश का हिस्सा है या फिर आग से उठता हुआ धुआँ, किंतु मुझे यह लगता है कि वह धुआँ ही है। आसपास का वन तीव्र और स्पष्ट तूलिका-आघातों से चित्रित किया गया है, जो अपने समय की तुलना में आश्चर्यजनक रूप से प्रभाववादी प्रतीत होते हैं। बाईं ओर वृक्षों के बीच से पूर्णिमा का चंद्रमा भी झाँकता दिखाई देता है।

गेंसबरो का शोबॉक्स आज भी सुरक्षित है और लंदन के विक्टोरिया एंड एल्बर्ट मियूसियम में संरक्षित है। इसके साथ उनके बनाए कुछ पारदर्शी चित्र भी आज तक सुरक्षित बचे हुए हैं।

— सारा मिल्स