सबसे महान बारोक चित्रकारों में से एक, जियोवॉना गर्ज़ोनी की कला की पुनः प्राप्ति 1964 में नेपल्स, रॉटरडैम, और ज़ूरिक में स्थित इतालवी स्थिर-जीवन चित्रों की युगांतकारी प्रदर्शनी में हुई थी। उस समय से, विद्वानों ने इस महान कलाकार के जीवन को फिर से संगठित करने का प्रयास किया है। उनकी परिष्कृत कृतियों की प्रशंसा फ्लोरेंस, नेपल्स, रोम, तुरिन और साथ ही फ्रांस के शाही दरबारों में होती थी।
उन्होंने अपने कार्यकाल की शुरुआत धार्मिक, पौराणिक और प्रतीकात्मक विषयों से करी, लेकिन बाद में वह मशहूर हुईं अपनी बेहद नाज़ुक वानस्पतिक स्थिर जीवन चित्रों के लिए, जिन्हें वह टेंपरा और जलरंगों से चित्रित करती थीं। वह अक्सर वस्तुओं का मिश्रण एक अनोखे अंदाज़ में करती थीं, जहाँ वह वानस्पतिक नमूनों को एशियाई पोर्सिलेन, दुर्लभ समुद्री सीपियाँ के साथ मिला कर ऐसी कृतियाँ बनती थीं जो वैज्ञानिक होने के साथ-साथ कवियात्मक भी थीं। हाल ही के सालों में विद्वानों ने उनकी रचनाओं को प्रोटोफ़ेमिनिस्ट यानी आदि-नारीवादी के नज़रिए से देखा, जहाँ उनकी कृतियों में उन्हें, महिला शरीर की ओर हल्के संकेत देखने को मिले।
अस्थाई रूप से एस्कॉली पिसेनो में रहने वाली एक साधारण वेनिसी परिवार में जन्मी गर्ज़ोनी, एक असाधारण स्वतंत्र जीवन जीती थीं, जहाँ वह कई कला केंद्रों के बीच यात्रा करने के बाद 1651 में रोम में स्थाई रूप से बस गईं। एकेडेमिया दी सान लूका से उनका रिश्ता बेहद गहरा था और आख़िरकार उन्होंने अपनी सारी सम्पत्ति उसी संस्था को समर्पित कर दी, जिसने उन्हें एक समारक और साँटी लूका ए मार्टिना के चर्च में पोर्ट्रेट चित्र से सम्मानित किया। अपने समय में वह "द चास्ट जियोवॉना" के नाम से जानी जाति थीं क्यूंकि उन्होंने अक्षतयोनि होने की प्रतिज्ञा ली थी। उन्होंने अपनी निजी स्वतंत्रता और कार्यकाल में सफलता दोनों को ही बखूबी निभाया।
पुनश्च - हमारा एनिमल्स 50 पोस्टकार्ड सेट ज़रूर देखिए, जिसमे गर्ज़ोनी की कृतियाँ भी शामिल हैं!
पुनः पुनश्च - जियोवॉना गर्ज़ोनी की बेहतरीन कला को देखिए!