हिंडोला by Mark Gertler - 1916 - 189.2 x 142.2 से. मी. हिंडोला by Mark Gertler - 1916 - 189.2 x 142.2 से. मी.

हिंडोला

कैनवास पर तेल रंग • 189.2 x 142.2 से. मी.

  • Mark Gertler - 9 December 1891 - 23 June 1939 Mark Gertler

    1916

यह चित्र पहले विश्वयुद्ध की चरम सीमा पर बनाया गया था, जो की इसका विषय भी प्रतीत होता है। कठोर अवस्था में पुरुष और महिलाएँ, उनके मुँह एक साथ मौन चीख में खुले हुए, एक अंतहीन परिक्रामी हिंडोले में क़ैद सीमित होते हैं। गर्टलर एक कर्तव्यनिष्ठ आपत्तिकर्ता थे। वह 1914-1915 की सर्दी में लंदन के हैम्पस्टेड हीथ मैं रहते थे, और शायद वहाँ घायल सैनिकों के लिए लगने वाला सालाना मेला उनकी प्रेरणा का स्रोत था। 15 सितंबर को लेखक डी. एच. लॉरेंस द्वारा जोई एकिंस को लिखे ख़त में उन्होंने वर्णन किया की : "घायल सैनिकों के लिए आज एक मेला आयोजित किया है, और अनगिनत घायल, अपनी नीली वर्दियों और लाल स्कार्फ़ में, बैंड, झूले और पूरे शोरगुल वाले उत्सव में शामिल हैं। यह सब बहुत अजीब लगता है।" रंगों का वर्णनन, और घायल सैनिकों और आम जानता के आनंद के बीच की यह अजीब तुलना पर उनकी इस टिप्पणी को, उनके मित्र गर्टलर के चित्र से जोड़ती है। पारंपरिक रूप से ख़ुशी और उल्लास का प्रतीक, हिंडोला, भयावह ढंग में, सैन्य यंत्र में रूपांतर तौर से तब्दील कर दी गई है। गर्टलर ने समझाया, "हाल ही में युद्ध की पूरी दहशत का एहसास मुझ पर गहराई से हुआ है।"