आज रविवार है, तो हम हमारे खास महीने को म्यूनिक के लेनबाखहाउस संग्रहण से आगे बढ़ाते हैं। इसका आनंद लीजिए! :)
साल 1913 और 1914 के बीच, कांडिंस्की बाइबिल और प्रलय से जुड़ी कल्पनाओं में पूरी तरह डूब गए थे। उस समय कि अराजकता को वह एक नए, कलात्मक तरीके से चित्रित करना चाहते थे। जैसा कि उन्होंने रेमिनिसेंसेज़ में कहा था: "चित्रकला विभिन्न दुनियाओं का एक ज़ोरदार टक्कर है, जो संघर्ष के ज़रिए एक नई दुनिया बनाती है, जिसे हम कला कहते हैं। तकनीकी तौर पर कला उसी तरह जन्म लेती है जैसे आपदाओं के ज़रिए ब्रह्माण्ड, जो आख़िरकार विभिन्न शोर के बीच उस सिम्फनी को रचती है जिसे हम म्यूजिक ऑफ़ द स्फीयरस कहते है। कला का निर्माण ही दुनिया का निर्माण है।"
उनकी कंपोज़िशन VII इसी प्रकार की प्रलय-सिम्फनी का एक विशेष उदाहरण है। यह चित्र जो अब मॉस्को की त्रेत्याकोव गैलरी में स्तिथ है, कांडिंस्की के म्यूनिक दौर में उनके काम की शिखर को दर्शाता है। उन्होंने कई महीने, प्रालेख और स्केच बनाए और ऐसे कई ऑइल स्टडी चित्रित किए। नवंबर 25, 1913 को वह एकदम तैयार थे जब 6.6 x 9.9 फीट का एक कैनवास उनके ऐनमिल्लरस्ट्रास वाले घर पर पहुँचा। गैब्रियल मुएंटर, जो ख़ुद एक कलाकार थीं और उस समय कांडिंस्की की साथी भी, कांडिंस्की कि हर प्रगति को अपनी डायरी में दर्ज करती रहीं और हर बार कैनवास की तस्वीर लेके इस बात की व्याख्या भी करी कि कैनवास कितना भरता जा रहा था। कई केंद्र से शुरुआत करते हुए कांडिंस्की ने यह कंपोज़िशन VII सिर्फ़ चार दिनों में पूरा कर दिया। नवंबर 28 को मुएंटर ने अपनी डायरी में बस इतना लिखा: " पिक्चर फिनिश्ड " यानी तस्वीर पूरी हुई।
पुनश्च - वासीली कांडिंस्की 20वी सदी के सबसे अहम चित्रकारों में से एक हैं। क्या आप कांडिंस्की की इन 5 मशहूर अमूर्त कला चित्रों को पहचानते है?
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