मारिया दुलेबियाँका पोलैंड की एक चित्रकार थीं। एक महिला होने के नाते, क्राकोव अकादमी ऑफ़ फाइन आर्ट्स में दाखिला ना मिलने पर, दुलेबियाँका अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाने, विएना स्कूल ऑफ़ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स और पेरिस में अकादमी जूलियन गईं। आगे चलकर उन्होंने सक्रिय रूप से पोर्ट्रेट, पारिवारिक नज़ारे और सामाजिक परिवेश के दृश्य चित्रित किए। उनके चित्रों की विशेषता सूक्ष्मता और भावनात्मक गहराई से आती है, और उनके पोर्ट्रेट चित्र, ना केवल शारीरिक उपस्थिति को परंतु साथ ही विषय के व्यक्तित्व और उसके आंतरिक दुनिया का भी वर्णन करते हैं। उनकी कलात्मक विरासत का बस एक छोटा सा टुकड़ा ही आज देखने को मिल पाता है।
साल 1890 से, वह पॉलिश लेखिका मारिया कोनोपनिका के साथ विदेश में रहने लगीं; निजी परिस्थितियों के कारण जब भी उन्हें अलग होना पड़ता था, दुलेबियाँका वो हर एक प्रयास करती थी जिससे वह दोनों जल्द से जल्द दोबारा मिल सकें। समय के चलते दुलेबियाँका, महिलाओं के अधिकार, और बराबरी के विषय को लेकर खुलकर आवाज़ उठाने लगीं। उन्होंने विवादग्रस्त, फीमेल प्रीचर्स नाम का एक लेख भी प्रकाशित किया, जिसका सार "पुरुष मुझे दुनिया समझाते हैं" नामक वाक्य से समझा जा सकता है। उन्होंने कलात्मक शिक्षा में महिलाओं के समान अभिगम पर भी ज़ोर डाला।
पुनश्च - कई महत्वपूर्ण महिला चित्रकारों को पुरुषों के बराबर पहचान पाने के लिए, पूर्वाग्रहों से लड़ना पड़ा और कड़ी मेहनत भी करनी पड़ी। मिलिए उन पाँच महिलावादी चित्रकारों से जिन्होंने दुनिया बदल दी!
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Maria Dulębianka